Day 3 भारतीय इतिहास (ancient history)
ताम्र पाषाण काल
ताम्र पाषाण काल को दो भागों में बांट सकते हैं-
(क) परिवर्तित हड़प्पा स्थल
(ख) ताम्र पाषाण कालीन संस्कृतियां
इसके अतिरिक्त कुछ अन्य संस्कृतियां है जैसे- चित्र धूसर मृद भंडार संस्कृति तथा उत्तरी कोयल पालिश दार भंडार संस्कृति। सिंधु सभ्यता के पतन के पश्चात कतीपय संस्कृतियां अस्तित्व में आई। इसमें से कुछ संस्कृतियों पर सिंधु सभ्यता का प्रभाव देखा जा सकता है। इन्हें परिवर्तित हड़प्पा संस्कृति के नाम से जाना जाता है। इसके अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण संस्कृति हैं -
सिंधु में झुककर संस्कृति, पंजाब में बहावलपुर के कब्रगाह संस्कृति, गुजरात में लाल चमकीले मृदभांड संस्कृति, गंगा यमुना दोआब क्षेत्र में गैरिक दाभांड संस्कृति।
ताम्र पाषाण कालीन कृषि संस्कृतियां:-
इस संस्कृति में तांबे तथा पत्थर के उपकरणों का प्रयोग साथ साथ हुआ। कुछ ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति दक्षिण पूर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग, पश्चिम महाराष्ट्र में स्थापित हुई दक्षिण पूर्व राजस्थान में आहार या बनास संस्कृति का विकास हुआ। इसका विकास बानस घाटी में हुआ। इसका प्रारूप आहाार था। गिलुंड भी इसीी से। गिलुंड से गई ईटों का साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। आहाार से हमें लघु पाषाण उपकरण प्राप्त नहींं होतेे हैं, केवल तांबेेे के उपकरण प्राप्त हुए हैं। आहार और ताम्रवती भी कहा जाता है। आहार के मकान लकड़ी हुआ कच्ची मिट्टी के बदलेे पत्थरों के बने प्राप्त हुए हैं।
प्रश्न उत्तर
निम्नलिखित में से कौन सा योग असत्य है?
संस्कृति राज्य
क) मालवा संस्कृति - मध्य प्रदेश
ख) जोर्वे संस्कृति। - महाराष्ट्र
ग) आहाड़ संस्कृति। - राजस्थान
घ) कब्रगाह एच संस्कृति - पंजाब हरियाणा
(Please answer comment)
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